Is Dil ka kya karu..........
Tuesday, 18 November 2014
Aagosh
आज फिर दिल बेताब है आगोश मे समां जाने को ,
बस इंतज़ार हे ऐ ख़ुदा तेरे ईशारे का ,
मिट्टी मे मिलना हे या आसमां मे धुँआ हो जाना है………
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