Friday, 14 September 2012

Mai kya karu.....

बारिश मे बहती वो कागज़ की कश्ती 
दुनिया से बेखबर वो हमारी मस्ती 
वो भीगना, वो खेलना, वो दूसरो को भिगोना 
माँ की डांट पर वो किताबे खोलना 
और फिर उसके आँचल से वो लिपट कर सोना 

क्यों टीन्स सी उठी है आज फिर से वही खो जाने को 
क्यों मन कर रहा है आज फिर माँ के अंचल मे सो जाने को !!!!!

मै क्या करू .....इस दिल का क्या करू ..................